Breaking News

हाॅस्टल में तंग आकर सुसाइड करने निकला था यह भारतीय क्रिकेटर, फिर एक फोन ने बदल दी जिंदगी

कामयाबी हासिल करने के लिए कई बार इंसान को ऐसी मुसीबतों का भी सामना करना पड़ जाता है जिन्हें शायद वो फिर कभी भूला ना सके। कभी भूखे पेट भी दिन काटने पड़ जाते हैं तो कभी सड़क पर भी सोना पड़ता है। यह कहानी आज कईयों की हो सकती है। वहीं एक भारतीय क्रिकेटर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो संघर्ष करते हुए आज वो बुलंदियां हासिल कर चुके है जिसे हर कोई छूना चाहता है।

हाॅस्टल में लड़कों से तंग आकर निकला था सुसाइड करने
हम बात कर रहे क्रिकेटर सुरेश रैना की। रैना ने जब क्रिकेट सीखना शुरू किया था तो उन्हें कई चुनाैतियों का सामना करना पड़ा था। यहां तक कि वह तंग आकर सुसाइड करने भी निकल पड़े थे। पिछले साल रैना ने एक अखबार कोे दिए इंटरव्यू के दाैरान खुद खुलासा किया था कि जब वह 13 साल की उम्र में हाॅस्टल में थे तो कुछ लड़के उन्हें काफी तंग करते थे, जिससे परेशान होकर उन्होंने सुसाइड करने को सोच लिया था।

सुरेश रैना क्रिकेट में बचपन से माहिर थे और उनका खेलने का अंदाज इतना भरोसे से भरा होता था की उन्हें कोई हरा नही पाता था। उनके बेहतर खेल से कई लोग जलते थे और उन्होंने रैना को परेशान करना शुरू कर दिया। जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या करने बारे में सोचने लगे।

हुई पिटाई तो छोड़ दिया था होस्टल
रैना खेल में बेहद अच्छे से जिस वजह से उनके सीनियर उनसे अच्छा व्यवहार नही करते थे, रैना के कोच उन्हें बेहद पंसद करते थे क्योंकि वो एक अच्छे खिलाडी थे। रैना को कई बार आधी निंद से उठा दिया जाता था और उनके उपर ठंडा पानी डाल दिया जाता था। साथ ही उनके खान में भी घास ड़ाल दी जाती थी, ताकि वो अच्छा खेल न दिखा सकें।

छोड़ दिया था हाॅस्टल
एक बार रैना को हॉकी स्टिक से भी पीटा गया था, जिसके बाद रैना ने एक साल बाद ही हॉस्टल छोड़ दिया, लेकिन फिर रैना के भाई दिनेश ने दोबारा से उन्हें हॉस्टल पहुंचा दिया। रैना इस दौरान बेहद खराब मानिसक दौर से गुजर रहे थे, वो आत्महत्या करना चाहते थे लेकिन रैना उस वक्त अपने परिवार की मजबूरी समझते थे इसलिए वो वापस आ गए।

फिर एक काॅल ने बदल दी जिंदगी
एक समय फिर ऐसा आ ही गया जब रैना को आई एक काॅल ने पूरी तरह से बदलकर रख दिया। यह काॅल थी मुंबई की। उन्हें एयर इंडिया की तरफ से खेलने के लिए आॅफर किया गया। रैना वहां गए जहां प्रवीन आमरे से मिले। रैना ने आमरे से क्रिकेट के गुर सीखे। यही नहीं, रैना को 10 हजार की आर्थिक मदद भी मिली थी। इसके बाद रैना अपना पूरा ध्यान खेल पर रखते थे। रैना ने अपना लक्ष्य तय कर के रखा था और अपने पथ पर अडीग रहे और आत्महत्या का विचार छोड़ मुसीबतों से लड़ने की ठान ली शायद यही कारण है की आज सुरेश रैना को भारतीय टीम का एक अहम अंग माना जाता है।

About Anil Gupta

Check Also

19 साल बाद भारतीय टीम के पाकिस्तान दौरे पर अटल जी ने सौरव से कही थी ये बात

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी जी आज पंचतत्वों में विलिन हो जाएंगे लेकिन …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *