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महिलाओं के श्रृंगार की ये चीज़ देवी लक्ष्मी को करती है नाराज़

हमने अक्सर अपने बड़े-बुर्जुगों को ये कहते सुना होगा कि महिलाओं को हर तीज-त्योहार पर 16 श्रृंगार करने चाहिए। लेकिन क्या आपको पता एेसा क्यों कहा जाता है, क्योकि यहीं श्रृंगार घर-परिवार में सुख-समृद्धि लाते हैं। यह केवल उस लेडी की खुबसुरती को ही नहीं बल्कि उसके भाग्य में भी चार चांद लगा देते हैं। भगवान शिव का प्रिय माह सावन चल रहा है, तो उन्हें प्रसन्न करने के लिए भी ये श्रृंगार किए जा सकते हैं। लेकिन इनमें से कुछ एेसी भी चीज़ें है जो भूलकर भी प्रयोग में नहीं लानी चाहिए।

सबसे पहले श्रृंगार में सिंदूर और बिंदी लगाई जाती है। इनके बिना श्रृंगार अधुरा माना जाता है। मांग भरने के जो सिंदूर प्रयोग में लाया जाता है, कई स्त्रियां उसी को बिंदी के रुप में अपनी भौंहों के बीच में लगा लेती हैं।

कई महिलाओं को काजल और मेहंदी लगाना अच्छा नहीं लगता, किंतु काजल लगाने से आखों की खुबसुरती ओर बढ़ जाती है और साथ ही ये बुरी नज़र से भी बजाता है। तथा मेहंदी के रंग से पति के प्रेम की गहराई का पता चलता है। सावन में मेहंदी का प्रचलन कुवांरी लड़कियों में काफी ज्यादा है।

गजरे और मांग टीके का रिवाज आज कल कम ही देखने को मिलता है। लेकिन फिर भी स्त्रियां किसी त्योहार और शादी ब्याह में इसका इस्तेमाल कर लेती हैं। नववधू को मांग टीका सिर के बीचों-बीच इसलिए पहनाया जाता है ताकि वह शादी के बाद हमेशा अपने जीवन में सही और सीधे रास्ते पर चले।

पुराने समय में नथ पहनना अनिर्वाय माना जाता था। परंतु आज के टाइम में केवल छोटी सी नोजपिन पहनती हैं, जिसे लौंग कहा जाता है।

शादी के बाद हो या उससे पहले कान में पहने जाने वाले आभूषण को महिलाएं बहुत पंसद करती हैं। मान्यता है कि विवाह के बाद बहू को खासतौर से पति और ससुराल वालों की बुराई करने और सुनने से दूर रहना चाहिए।

मंगल सूत्र विवाहित स्त्री का सबसे खास और पवित्र गहना माना जाता है। यह एक सुहागन का पति के प्रति वचनवद्धता का प्रतीक माना जाता है।

बाजूबंद और चूड़ियां देखने में एक जैसी प्रतीत होती है। बाजू के उपरे हिस्से में बाजूबंद को पहना जाता है, जोकि आज के समय में कम ही किसी के पास देखने को मिलता है। लेकिन चूड़ियां तो सुहागिन स्त्रियों का सबसे बड़ा गहना माना गया है। सावन में सब महिलाएं चाहे वह कुंवारी हो या विवाहित लाल और हरे रंग की चूड़ियां जरुर पहनती हैं।

शादी से पहले मंगनी या सगाई के रस्म में वर-वधू द्वारा एक-दूसरे को अंगूठी को सदियों से पति-पत्नी के आपसी प्यार और विश्वास का प्रतीक माना जाता रहा है।

कमरबंद एक एेसा गहना है जो आज के समय में कम प्रयाग में लाया जाता है। लेकिन ये नववधू के लिए पहनना जरुरी होता है। कमरबंद इस बात का प्रतीक है कि सुहागन अब अपने घर की स्वामिनी है।

पैरों के अंगूठे और छोटी अंगुली को छोड़कर बीच की तीन अंगुलियों में चांदी का बिछुआ पहना जाता है साथ में चांदी की पायल भी पैरों में पहनने का रिवाज है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह केवल चांदी के बने ही होने चाहिए, सोने के नहीं क्योकि सोने को पवित्र धातु का स्थान प्राप्त है। एेसी मान्यता है कि पैरों में सोने का कोई आभूषण पहनने से धन की देवी माता लक्ष्मी का अपमान होता हैं।

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