दोषी अंकुर पवार की फांसी की सजा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदला

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निताबेनिबॉगडे 

बुधवार को चर्चित प्रीति राठी तेजाब हमला मामले में दोषी अंकुर पवार की फांसी की सजा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द करते हुए उम्रकैद में तब्दील कर दिया। साल 2016 में विशेष महिला अदालत ने अंकुर को प्रीति पर तेजाब फेंकने और उसकी हत्या का दोषी करार देते हुए फंसी की सजा सुनाई थी। इसे उसने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

क्या है प्रीति राठी तेजाब कांड?

मामला साल 2013 का है। शादी का प्रस्ताव ठुकराने से नाराज हो अंकुर ने  2 मई, 2013 को उस वक्त प्रीति पर एसिड से हमला किया था जब वो बांद्रा टर्मिनस पर गरीब रथ एक्सप्रेस से उतर रही थी। उस वक्त प्रीति के पिता, आंटी और अंकल भी उसके साथ थे। दिल्ली के नरेला की रहने वाले प्रीति पहली बार मुंबई आई थी, उसे भारतीय नौसेना में नर्स के तौर पर जॉइन करना था।

ऐसे पकड़ा गया अंकुर

मामले में जांच के बाद 10 मई 2013 को पुलिस ने रोहतक के रहने वाले बी.टेक. के एक छात्र को गिरफ्तार किया पर बाद में सबूतों के अभाव में उसे छोड़ दिया गया। 1 जून 2013 को प्रीति ने दम तोड़ दिया। क्राइम ब्रांच ने इसके बाद अंकुर को 17 जनवरी, 2014 को गिरफ्तार किया। हमला करने के दौरान वह चेहरे पर नकाब पहने हुआ था।

इस आधार पर अदालत ने ठहराया था दोषी

मामले में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील उज्जवल निकम ने कहा था कि आरोपी अंकुर के कॉल रेकॉर्ड्स से यह साबित हुआ कि वह उसी ट्रेन में सफर कर रहा था, जिसमें प्रीति मौजूद थी। निकम ने अदालत को बताया था कि हमले से कुछ दिन पहले प्रीति ने अपनी एक दोस्त को बताया था कि अंकुर ने उसे मुंबई आने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी। वहीं अदालत के बाहर पंवार की मां कैलाश ने मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए उनके बेटे को फंसाए जाने का आरोप लगाया था।

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