पहली बार दहेज देने वाले बाप पर केस दर्ज , 3 करोड़ में पक्की हुई थी शादी

छत्तीसगढ़ः शादियों में दहेज लेना और देना आम बात है। कुछ शादियां बिना दहेज के होती भी नहीं है औकर कुछ तो दहेज की वजह से टूट भी जाती हैं। लेकिन सरकार की तरफ से दहेज लेने और देने को गैर कानूनी माना गया है। इसके लिए सजा का प्रवधान भी हैं। वहीं अब तक यही सुनते आए थे कि दहेज लेने वाले वर पक्ष पर दहेज लेने का आरोप लगा है और उन पर केस दर्ज हुआ है, लेकिन छत्तीसगढ में पहली बार एक बाप पर केस दर्ज हुआ है, क्योंकि उसने अपनी बेटी के ससुराल वालों को 3 करोड़ रुपए का दहेज दिया था। यह बात खुद लड़की के पिता ने स्वीकार की है और राज्य में अपने आप में यह पहला मामला है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य में दहेज लेने और देने में कमी आएगी।

जानकारी के मुताबिक, रूही की शिकायत के बाद पुलिस ने निमिष को दहेज अधिनियम के तहत आरोपी बनाया। केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहुंचा, जहां जज हरीश कुमार अवस्थी की अदालत में सुनवाई शुरू हुई।सुनवाई के दौरान रूही और उनके पिता विजय अग्रवाल ने दो किस्तों में दहेज की रकम देने की बात स्वीकार की। पिता ने भी माना कि बतौर दहेज उन्होंने 2.50 करोड़ और फिर 60 लाख रुपए वर पक्ष के परिवार के सदस्यों के खाते में जमा कराए हैं।  बस, इसी को आधार बनाकर आरोपी निमिष ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लड़की वालों के खिलाफ याचिका लगा दी। इस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने रूही और विजय अग्रवाल पर मामला दर्ज करने का आदेश जारी किया।

आपको बता दें कि दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 के तहत अगर कोई व्यक्ति दहेज देगा या लेगा या फिर दहेज देने-लेने के लिए उकसाए, तो इस नियम के तहत आरोपी होगा। आरोप सिद्ध होने पर कम से कम पांच साल की सजा और 15 हजार से दहेज की रकम तक दोनों में जो अधिक होगा, का जुर्माना होगा। यह गैर जमानती धारा है।

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