माल्या विवाद के बाद स्वामी के बदले ‘तेवर’, जेतली से मांगा इस्तीफा

भारतीय जनता पार्टी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी अपने अक्सर विवादों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। कांग्रेस पर लगातार हमलावर स्वामी अब अपनी पार्टी को ही निशाने पर ले रहे हैं। विजय माल्‍या के दावे पर छिड़ी बहस के बीच उन्होंन अरुण जेतली पर कई सवाल खड़े कर दिए है। यही नहीं भापजा नेता ने वित्त मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है। स्वामी ने वित्त मंत्री के इस्तीफे वाली कांग्रेस की मांग का समर्थन करते हुए पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कैसे एक इस्तीफे की वजह से देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू की लोकप्रियता को धक्का लगा था। भाजपा नेता ने ट्वीट कर लिखा कि 1962 में चीन से हुए युद्ध में भारत को मिली हार के बाद मेनन (तब के रक्षा मंत्री) के इस्तीफे की मांग उठी थी। नेहरू ने इसी मांग को खारिज करके अपनी चमक खो दी।
स्वामी ने लिखा कि तब नेहरू ने कांग्रेस की पार्लियामेंट्री पार्टी से कहा था कि अगर मेनन का इस्तीफा होगा तो मेरा भी इस्तीफा होगा। पार्लियामेंट्री पार्टी ने इसके जवाब में नेहरू से कहा कि ऐसे में वो भी इस्तीफा दे दें। उनके मुताबिक पार्लियामेंट्री पार्टी के इस स्टैंड के बाद नेहरू ने कदम पीछे खींच लिए और मेनन को बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि भाजपा नेता ने किसी का नाम नहीं लिया है लेकिन उन्होंने इशारों-इशारों में पीएम को चेताया है कि अगर वो जेतली का इस्तीफा नहीं लेते तो उनकी लोकप्रियता को धक्का लग सकता है।
बता दें कि स्वामी ने वीरवार को भी वित्त मंत्री पर कई सवाल उठाए थे। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि किसी शक्तिशाली और अधिकृत स्तर के शख्स ने माल्या को भागने में मदद की, क्योंकि बिना किसी बड़े शख्स की मदद के माल्या देश से बाहर नहीं जा सकता था। उन्होंने कहा कि 2016 में अगर सीबीआई के लुक आउट नोटिस को कमजोर न किया गया होता तो माल्या देश छोड़कर नहीं जा सकता था।

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