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जर्मनी ने लॉन्च की दुनिया की पहली ऑटोनॉमस ट्राम

सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए दुनिया की पहली ऑटोनॉमस ट्राम को जर्मनी में शुरू कर दिया गया है। इसे AI-पावर्ड ड्राइविंग कैपिबिलिटीज़ से लैस किया गया है, यानी यह स्वचालित तरीके से काम करती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें मल्टीपल रडार, LIDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) और कैमरा सेंसर्स लगाए गए हैं, जो डिजिटल आंखों की तरह काम करते हैं। यह सिस्टम साइड में लगे सिग्नल्स को डिटेक्ट करता है और बाइक, कार व पैदल चलने वाले लोगों का पता लगा कर ट्राम को खुद-ब-खुद रोकने में मदद करता है, जिससे हादसे के जोखिम को कम किया जा सकता है।

– सीमन्स कंपनी द्वारा तैयार की गई इस Combino ट्राम को फिलहाल जर्मनी के एक शहर पॉट्सडैम में 6 किलोमीटर के ट्रैक पर शुरू किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इसका विस्तार किया जाएगा।

ट्राम में लगे सेंसर्स 

इससे पहले बर्लिन में आयोजित ट्रांसपोर्ट एक्सपो में इस ऑटोनॉमस ट्राम का सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया था। इस दौरान जरूरत पड़ने पर मदद के लिए ड्राइवरों को भी शामिल किया गया था। टेस्ट के दौरान इसके सामने से बाइक्स, प्रैम्स व कारों को निकाला गया। ऐसे में, ट्राम के सामने लगे सेंसर्स ने ब्रेक लगा दिया और सुरक्षा के लिहाज से इसे रोक दिया। ह्यूमन ऑपरेटरर्स द्वारा इसके बाद ऑटोनॉमस ड्राइविंग सिस्टम को दोबारा से ऑन कर दिया गया।

इंटेलिजेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर

‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्हीकल को बनाने में 50 कम्प्यूटर साइंटिस्ट्स, इंजीनियर्स, मैथेमेटिशियन्स और फिजिसिस्ट्स लगे। सीमन्स मोबिलिटी के CEO सबरीना सोससन ने कहा है कि इस ट्राम को बनाने के लिए पहले इसके इन्फ्रास्ट्रक्चर को काफी इंटेलिजेंट बनाया गया है। हम गारंटी देते हैं कि इस नई तकनीक से लोकल और लॉन्ग डिस्टेंस ट्रैवल में आसानी होगी।

जर्मनी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बैकबोन है ट्राम

जर्मनी में ट्राम को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का बैकबोन कहा जाता है। यहां सबसे पहले इन हाउस तैयार की गई ट्राम को 1880 में शुरू किया गया था। इसके बाद इसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक अच्छा जरिया कहा जाने लगा। फिलहाल, 187 किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस शहर के 28.9 किलोमीटर के रूट को ट्राम कवर कर रही है।

इस कारण लाई गई ऑटोनॉमस ट्राम

पॉट्सडैम शहर की जनसंख्या 172,000 है जो तेजी से बढ़ रही है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए देते हुए ऐसी ऑटोनॉमस ट्राम को अब लाया गया है। आने वाले समय की ट्राम नवीकरणीय ऊर्जा से काम करेगी और उनमें 250 यात्री एक बार में सफर करेंगे।

ऑटोनॉमस ट्राम में फिर भी मौजूद रहेंगे 2 ड्राइवर

रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर काम करने वाली इस ट्राम में दो ड्राइवर भी होंगे, जो विशेष व्यक्तियों और ट्राम में आने वाले लोगों की मदद करेंगे, यानी इस तकनीक को सिर्फ सुरक्षा के मद्देनजर लाया जा रहा है और इससे किसी भी कर्मचारी की जॉब नहीं जाएगी।

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