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लॉ में बनाएं करियर, मिलेंगे ढेरों अवसर

नई दिल्ली : देश में बढ़ते अपराधों की संख्या और न्याय व्यवस्था धीमी होने की वजह से कई बार बहुत गुस्सा आता है कि काश हम कुछ कर पाते है। एेसे में अगर आप भी देश की न्याय व्यवस्था में सुधार और अपराधों में कमी लाना चाहते है तो लॉ में करियर आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। आइए जानते है कि कैसे आप इस फील्ड में करियर बना सकते है।

कौन हैं लॉयर
प्रतिष्ठित शब्दकोशों के मुताबिक लॉयर वह व्यक्ति है, जो कानूनी दांवपेचों को जानने और समझने में कुशल हो। एक अन्य परिभाषा पर गौर करें, तो लॉयर किसी सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा अधिकृत वह व्यक्ति होता है, जो लॉ की प्रैक्टिस करने के अलावा अपने क्लाइंटों को कानूनी मुद्दों पर सलाह देने का कार्य करता है। किसी आम व्यक्ति की दृष्टि से देखें, तो लॉयर वह व्यक्ति है, जो किसी व्यवस्था (खासकर वैधानिक) की खामियों को तलाशने में दक्ष होता है।

काम
कानून के ये पेशेवर अपने क्लाइंट के लिए वकील और सलाहकार (एडवाइजर) की भूमिका निभाते हैं। दीवानी (सिविल) या फौजदारी (क्रिमिनल) मामलों में ये वादी (कम्प्लेनेंट) या प्रतिवादी (डिफेंडेंट) का संबंधित अदालतों में पक्ष रखते हैं। वह अदालत में अपने क्लाइंट की ओर से मुकदमा दायर करते हैं और उसके पक्ष को लेकर बहस भी करते हैं। वह किसी मामले विशेष के लिए कानूनी स्थितियों को स्पष्ट भी करते हैं। एडवाइजर या सॉलिसिटर के रूप में वह अपने क्लाइंट को परामर्श देते हैं कि उनके (क्लाइंट के) मामले से संबंधित तथ्यों पर कौन-सा कानून किस तरह लागू होगा। अदालत में मामला पहुंचने पर सॉलिसिटर संबंधित मामले की पैरवी करने वाले वकील को जरूरी सलाह भी देते हैं।

कैसे बनें वकील
लॉ की पढ़ाई के बाद शुरुआती दौर में किसी वकील के साथ जूनियर असिस्टेंट के रूप में काम करना होता है। इस दौरान फाइलिंग, रिसर्च, अदालतों से तारीख लेना, नियोक्ता वकील के साथ अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लेना और केस ड्राफ्ट करना (मुकदमे के कागजात तैयार करना) आदि काम करने पड़ते हैं। वकालत से जुड़ी इन बुनियादी चीजों को समझने के बाद स्वतंत्र रूप से वकील के रूप में काम शुरू किया जा सकता है।

कैसे बनें सॉलिसिटर
इसके लिए आर्टिकलशिप या पढ़ाई के दौरान किसी सॉलिसिटर फर्म में जूनियर के रूप में काम किया जा सकता है। यहां भी जूनियर को वकालती पेशे से जुड़े रोजमर्रा के काम (मसलन केस को पढ़ना, सूट फाइल करना और नोटिस तैयार करना आदि) करने होते हैं। इस दौरान जूनियर को अपने वरिष्ठों के मार्गदर्शन में तरह-तरह के कानूनों (लेबर, टैक्सेशन और इंडस्ट्रियल लॉ आदि) से संबंधित मामलों को समझने का मौका मिलता है। कुछ वर्षो के अनुभव के बाद जूनियर अपने वरिष्ठों के समान ही दक्ष हो जाते हैं। इसके बाद वह किसी भी सॉलिसिटर फर्म में सॉलिसिटर बन सकते हैं।

संभावनाएं
मौजूदा वक्त में लॉ ग्रेजुएट के लिए भरपूर संभावनाएं हैं। वह एडवोकेट के रूप में किसी न्यायालय में प्रैक्टिस करने के अलावा किसी कॉर्पोरेट फर्म के लिए भी काम कर सकते हैं। इसी तरह राज्यों के लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली न्यायिक सेवा परीक्षा को पास करके जज भी बना सकता है। वकालत का लंबा अनुभव होने पर सॉलिसिटर जनरल या पब्लिक प्रोसिक्यूटर बनने का भी अवसर होता है। इसी अनुभव की बदौलत सरकारी विभागों और मंत्रलयों में भी काम हासिल करना संभव होता है। इतना ही नहीं लॉयर बनकर किसी फर्म या ऑर्गनाइजेशन में लीगल एडवाइजर या लीगल काउंसिल के रूप में भी काम किया जा सकता है। इसके अलावा उनके पास टैक्स, एक्साइज, पेटेंट, लेबर और इंवायरन्मेंटल लॉ आदि से संबंधित लीगल कंसल्टेंसी फर्मो में काम करने का भी विकल्प होता है। वह विभिन्न ट्रस्टों के लिए ट्रस्टी के रूप में और प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठनों में लीगल रिपोर्टर के रूप में भी काम कर सकते हैं। लॉ पेशेवरों के पास लॉयर बनने के इतर भी करियर के लिहाज से कई विकल्प होते हैं। वह लॉ कॉलेजों और स्कूलों में लेक्चरर या असिस्टेंट प्रोफसर बनकर अध्यापन कर सकते हैं। इतना ही नहीं वह राजनीति में भी उतर सकते हैं, क्योंकि काम के सिलसिले में उनका काफी लोगों से संपर्क रहता है।

योग्यता 
छात्र अपनी सुविधा के अनुसार लॉ के तीन वर्षीय या पांच वर्षीय बैचलर डिग्री पाठय़क्रम में से किसी एक को अध्ययन के लिए चुन सकते हैं। तीन वर्षीय पाठय़क्रम में प्रवेश ग्रेजुएशन के बाद मिलता है, जबकि पांच वर्षीय पाठय़क्रम में दाखिला बारहवीं के बाद होता है। देश के जिन विश्वविद्यालयों में लॉ का तीन वर्षीय पाठय़क्रम उपलब्ध है, वहां संबंधित संस्थान द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा के जरिए दाखिले होते हैं। पांच वर्षीय पाठय़क्रम की दाखिला प्रक्रिया को देखें, तो देश की 14 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी इसके लिए क्लैट (कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट) नाम से प्रवेश परीक्षा का आयोजन करती हैं। इस परीक्षा में 50 फीसदी अंकों के साथ बारहवीं पास हुए छात्र आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा में इंग्लिश, जनरल नॉलेज, मैथमेटिकल एबिलिटी, लीगल एप्टिटय़ूड और लॉजिकल रीजनिंग से प्रश्न पूछे जाते हैं। देश के कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी लॉ में पांच वर्षीय पाठय़क्रम उपलब्ध हैं। दाखिले के लिए ये सभी संस्थान अपने स्तर पर प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते हैं।

लॉ में बैचलर डिग्री पाने के बाद एलएलएम और पीएचडी भी किया जा सकता है। इससे शिक्षण के क्षेत्र में जाने में मदद मिलेगी। अगर आप किसी किसी कानून विशेष में स्पेशलाइजेशन करना चाहते हैं, तो पीजी डिग्री और पीजी डिप्लोमा स्तर पर स्पेशलाइजेशन के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं।

पाठय़क्रमों का नियमन
देश में एलएलबी पाठय़क्रमों का नियमन बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) करता है। इसके अलावा देश में वकालत के लिए जरूरी दिशा-निर्देशों और नियमों को तय करने का कार्य भी बीसीआई करता है।

जरूरी गुण
बेहतर संवाद कौशल
अच्छी याददाश्त
त्वरित प्रतिक्रिया देने का सामर्थ्य
तार्किकता और चीजों का विश्लेषण करने में दक्षता
ध्यान से बातों को सुनने का धैर्य
दायरों को पार जाकर सोचने का हुनर
कानूनी पहलुओं की बेहतर जानकारी
समर्पण के साथ कड़ी मेहनत करने का जज्बा

उपलब्ध पाठय़क्रम
एलएलबी, अवधि: तीन वर्ष
बीए एलएलबी (ऑनर्स), अवधि : पांच वर्ष
बीएससी एलएलबी (ऑनर्स), अवधि : पांच वर्ष
बीकॉम एलएलबी (ऑनर्स), अवधि : पांच वर्ष
एलएलएम
पीएचडी

संबंधित संस्थान
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी
सिंबायोसिस सोसायटीज लॉ कॉलेज, पुणे
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर
नल्सर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद
नेशनल लॉ इंस्टीटय़ूट यूनिवर्सिटी, भोपाल
फैकल्टी ऑफ लॉ, यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज, कोलकाता
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली

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